Monday, 1 July 2019

"नारी"

"एक शक्ति है,
तो एक भक्ति भी है नारी,
एक राह है,
तो एक मंजिल भी है नारी,
सहनशीलता की मूरत है वो,
तो,
बुलंद आवाज भी है नारी,
जहाँ,
ग्रहणशीलता के गुणों से भरी है,
वही,
ओजस्वपूर्ण बन अपने उद्गार,
उजागर करती है नारी,
सहज, सरल भी है पर,
वक्त आने पर,
पत्थर भी बन जाती है नारी,
जहाँ,
यशोदा के वात्स्लय से,
परिपूर्ण है, वही
झाँसी की रानी बन,
तलवार भी उठा लेती है नारी,
जहाँ समाज और देश चलाने का
हुनर रखती है,
वही
रॉकेट भी उड़ा लेती है नारी,
माँ, बहन, पत्नी, बेटी,
सभी किरदार,
बखूबी निभाती है नारी।"