"एक शक्ति है,
तो एक भक्ति भी है नारी,
एक राह है,
तो एक मंजिल भी है नारी,
सहनशीलता की मूरत है वो,
तो,
बुलंद आवाज भी है नारी,
जहाँ,
ग्रहणशीलता के गुणों से भरी है,
वही,
ओजस्वपूर्ण बन अपने उद्गार,
उजागर करती है नारी,
सहज, सरल भी है पर,
वक्त आने पर,
पत्थर भी बन जाती है नारी,
जहाँ,
यशोदा के वात्स्लय से,
परिपूर्ण है, वही
झाँसी की रानी बन,
तलवार भी उठा लेती है नारी,
जहाँ समाज और देश चलाने का
हुनर रखती है,
वही
रॉकेट भी उड़ा लेती है नारी,
माँ, बहन, पत्नी, बेटी,
सभी किरदार,
बखूबी निभाती है नारी।"
इस 'खुबसूरत सृष्टि' की एक रचना हूँ मैं | मेरा नाम इंदु आचार्य है और अदना सा शौक है अपने विचारों को कागज़ पर उतरने का | मैंने अपने लेखन में प्रकृति, जीवन के रूपों, भावनाओं को समेटने की कोशिश की है | आपको कहीं प्यारभरी सौगातें देखने को मिलेंगी तो कहीं दर्दभरी दास्ताँ | मैं अपने विचार, अपनी सोच, अपने तरीके से आपके समक्ष रख रहीं हूँ | आशा है, आपको मेरी लेखनी पसंद आयेगी |
Monday, 1 July 2019
"नारी"
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