Sunday, 6 June 2021

▪️गुड़िया की दो पोटली ▪️

लघुकथा

पूनम ने गुड़िया को आवाज लगाई, "अरे गुड़िया, बेटा देखो, मैं लौंग वहीं गैस स्टेंड पर भूल आई हूं, ला कर दे दो जरा।"
 गुड़िया पूनम की चार साल की बेटी है और अक्सर नन्हें नन्हें हाथों से जैसा उससे बनता, पूनम की मदद कर देती थी। "लाई मम्मा" अपनी प्यारी सी आवाज में गुड़िया बोली।
दो दिन से पूनम सोच रही‌ थी कि कपूर, अजवाइन और लौग डालकर पोटली बना लें, पर वक्त ही नहीं मिल पा रहा था। आज तो उसने सोच ही लिया था कि बनाकर ही रहूंगी। पहले भी‌ बनाई थी उसने, पर सब कपूर भी उड़ चुका था और खुशबू भी नहीं आती थी। उसे पता था, अभी जो भी समय चल रहा है उसमें यह छोटा सा उपाय भी कारगर है। गुड़िया लौंग लेकर पूनम के पास आ गई थी। "मां मैं भी बनाऊंगी पोतली", अपनी थोड़ी तुतलाती ज़बान में उसने कहा।

       पूनम ने प्यार से मुस्कुराते हुए उसकी तरफ‌ देखा और पास में बैठा लिया।
 सभी सदस्यों की पोटलिया' लगभग बन चुकी थी।
जबसे पोटली बनाने का कार्यक्रम शुरू हुआ तबसे गुड़िया का बोलना चालू था, "मम्मा, मै दो पोतली लूंगी।"  वो‌ बीच बीच‌ में परेशान‌ ना‌ करे, इसलिए पूनम भी कह देती, "हां बेटा, ले लेना"।
आखिरकार सब पोटलियां तैयार हो गई। अब नन्हे नन्हे हाथों से गिनती शुरू हुई, "ये दादाजी ती, ये दादीजी ती, ये पापा ती, ये मम्मा ती और ये मेली, ऐसा कहकर उसने दोनों पोटली अपनी छोटी सी मुट्ठी में दबा ली।
   पूनम ने एक एक पोटली सभी को दे दी और गुड़िया से कहा, "बेटा, आपके पास दो पोटली है, एक आप रखो और एक हमें दे दो, हम आपको बाद में दे देंगे।"

"अले मम्मा, ये तो पियाली आंती की है ना"  उनको देना है। मैं दे आऊ उनको। उनको भी कोलोना नहीं होगा ना।"
दरअसल पूनम के पड़ोस में एक अंकल आंटी रहते थे, उनके कोई बच्चे नहीं थे, गुड़िया अक्सर उनके यहां खेलने जाया करती थी। बहुत प्यार करते थे दोनों गुड़िया को। पर पिछले साल करोना की वजह से अंकल नहीं रहे और आंटी अकेले रह गई थी।
गुड़िया पूनम का हाथ पकडकर उनके घर चलने की जिद कर रही थी और पूनम खड़े खड़े सोच रही थी कि गुड़िया को कैसे बताऊं  कि उसकी प्यारी आंटी तीन दिन पहले ही कोरोना की वजह से हमसे दूर चली गईं??
पूनम की आंखों में बरबस अश्रुधारा बह चली और गुड़िया को सीने से लगा लिया। क्या जवाब दूं??

इंदु आचार्य
12/05/2021
बोईसर (मुंबई)

Tuesday, 1 June 2021

अगर यह सच है



अगर यह सच है कि
 बुराई पर अच्छाई की जीत होती है,
तो अब तक सर्वत्र अमन, चैन क्यूं नहीं है।
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अगर यह सच है कि
पशु, पक्षी प्रकृति का खूबसूरत हिस्सा है,
तो कोई बेरहम इंसा इनका शिकार करता क्यूं है?

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अगर यह सच है कि
वृक्ष अमूल्य जीवन की आधार स्वरूप इकाई है,
तो नवनिर्माण का वास्ता देकर क्यूं काट दिये जाते हैं?