खुद को संवारा हमने,
मुस्कुराहट सी,
आ गई चेहरे पर,
पर सौभाग्य तो,
उस सुन्दर तितली का है,
उस खूबसूरत मोर का है,
कोई आईना नही स्वदर्शन का,
फिर भी हर दिल को सुकून
हर नज़र को भावविभोर
कर दिया करते हैं,
सच भी है,
आईना देखकर कहीं उन्हें भी
मानव जैसा घमंड
हो जाता तो ?
है ना कुदरत का सुंदर नियम।
😊
इंदु आचार्य
०६/०३/२०२१