Sunday, 9 May 2021

मां तू ही तू

मां, मेरी पूजा है तू
मेरी प्रार्थना भी तू,
मां, श्रद्धा है तू 
और आराधना भी तू, 
जीवन का आधार है मां तू
निस्वार्थ अनमोल प्यार तू,
प्यारी सी झिड़की है तू
तो दुलार का भंडार भी,
मेरा हास्य विनोद सब‌कुछ है तू
रूदन भी और क्रन्दन भी,
पुष्प की सुगंध प्यारी सी
और‌ बगिया की बहार है तू,
शीतलता का‌ पर्याय तो है ही
तपन का अभिप्राय भी,
इन्द्रधनुषी रंग समेटे
बारिश की‌ पहली फुहार तू,
हर‌कदम पर मुझे आगे बढ़ाता
ऐसा आत्मविश्वास तू,
निर्मल जलधारा भावों की
गहरा सा वो सागर भी
जो पत्थर का सीना चीरे
ऐसी ऊंची लहरें तू,
आशीर्वादों की‌ जो झड़ी लगा दे
ईश्वर का ऐसा स्वरूप है तू,
तेरी महिमा क्या मैं गाऊ
ऐसा असीमित विषय है तू,

Saturday, 8 May 2021

सब याद आता है मुझे

🌹मां 🌹

मां सब याद आता है मुझे....
खुद गीले में सोकर, मुझे सूखे में सुलाना
गिर ना जाऊं कहीं, 
इसलिए रात भर चौकसी  भी करना,
मां सब याद.....
वो ममता का आंचल,‌ वो प्यारी सी लोरी
हाथ में तेरे रात भर, वो झूले की‌ डोरी,
मां सब याद ........
उंगली पकड़कर चलाना, फिर छोड़ देना,
खुद से चलने पर 
तेरा खुशी से पागल हो जाना,
मां सब याद है......
प्यार से काजल का टीका लगाना
और दुनिया की बुरी नजर से बचाना,
मां सब याद......
मिट्टी में खेलने पर बहुत डांट लगाना
फिर पल्लू से मिट्टी पोंछ, हाथ धुलाना,
मां सब याद.....
झगड़ा ना करना, ऐसी हिदायतें देना
और झगड़ा करु तो अपने पीछे छुपाना,
मां सब याद....
खुद जोर की फटकार लगाना
पर बाबूजी की डांट से मुझको बचाना,
मां सब याद.... ।
बालों में प्यार से तेल मालिश भी करना
बाल बनाकर एक प्यारी सी पप्पी भी देना,
मां सब याद.....
गलती पर पिटना और आंखें दिखाना
उन्हीं आंखों से फिर अकेले में आंसू बहाना,
मां सब याद.......
मिट्टी के चूल्हे की गरम गरम रोटी खिलाना, 
सबको खिलाकर खुद बाद में खाना, 
दाल में तेरा वो घी का डालना,
मां सब याद.......
जरा देर हो जाये आने में मुझको
तो बेवजह तेरा ढेरों चिंताएं करना,
मां सब याद.......
परीक्षा मेरी में तेरा रात रात भर जागना
हर दो घंटे में तेरा कॉफी बनाना,
मां सब याद.....
हर पेपर में भगवान से प्रार्थना भी करना
पास होने पर सबको ख़ुशी से बताना
मिठाई मंगाना और सबको खिलाना,
मां सब याद......
रोशनी बनके मेरी, राह के अंधेरे हटाना
खुद ठहर धरा पर, मुझे आसमां दिखाना,
मां सब याद.......
तुझे छोड़कर मेरा विदेश जाना
दिल में रोना पर मुझे ना दिखाना,
मां सब याद....
मेरी मौत से तेरा हर पल झगड़ना
हर‌ क्षण ईश्वर से प्रार्थना भी करना,
मां सब याद.......
जानता हूं मैं तेरी परछाई हूं मैं
पल पल हर पल तेरे करीब हूं मैं
इसलिए सब याद........
तेरी सारी मेहरबानियां
दिल से महसूस करता हूं मै
क्योंकि मां आज भी
सब याद आता है मुझे.........


🔸 इंदु आचार्य🔸
08/05/2021 (pc-- Internet)

Thursday, 6 May 2021

अचार की दो फांक

अपने स्कूल के वक्त की एक घटना शेयर कर रही हूं।

"मुझे तुम्हारी हिंदी की कापी दे दो, कुछ उत्तर लिखने है।" मेरे साथ एक‌ ही क्लास में पढ़ रही‌ सीमा शुक्ल ने मुझसे कहा।
मैं उस समय दसवीं कक्षा में थी और कक्षा में मैं हिंदी लेखन और शुद्ध उच्चारण  में सबसे आगे थी, कारण मेरी बड़ी दीदी मुझे पढ़ाती थी और उन्होंने हिंदी में *डबल एम,ए,* किया था । पता नही क्यूं मैं सीमा को पसंद नहीं करती थी, शायद इसलिए कि वो मेरे घर के सामने रहती थी और मेरे घर कभी भी आ जाती थी। कितनी बार उसने कहा कि तुम्हारे साथ स्कूल चलूंगी लेकिन मैं कोई ना कोई बहाना बनाकर‌ उसे टाल देती थी। उसके हिंदी की कापी मांगने पर मैंने मना कर दिया, उसने कुछ कहा नहीं, पर उदास सा मुंह लेकर चली गई। थोड़ी देर बाद ही हमारे क्लास की सबसे बुद्धिमान कहीं जाने वाली विभा मेरे पास आई और मुझसे वहीं हिंदी की कापी मांगी। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे उसे दे दी, क्यूंकि मेरे लिए यह खुशी की बात थी कि फर्स्ट क्लास लड़की मेरी कापी मांग रही है । चार पीरियड के बाद दस मिनट की खाने की छुट्टी होती‌ थी, उसमें हमें खेलना भी होता था‌ और खाना भी खाना होता था, दोनों काम हो जाये इसके लिए  हम टिफिन हाथ में लेकर खाना भी‌ खाते‌ रहते और दौड़ दौड़कर पकड़म पकड़ाई भी‌ खेलते रहते थे।  हमारा खेल भी चल रहा था और खाना भी। इसी बीच पता‌ नही कैसे परांठे में रखी मेरी सारी सब्जी नीचे गिर गई। परांठे भी सादे थे और खाना अभी शुरू ही किया था, थोड़ा मन उदास हो गया, मैंने किसी से कहा भी‌ नही और शायद किसी ने देखा भी नही। अभी तो दो घंटे और बिताने है शाला मे।
इतने में आवाज आती है, अरे मेरे पास बहुत सारा अचार है दोनों मिलकर खा लेंगे, देखा तो सीमा थी,  किस मुंह से अचार लूं ..? मेरे मना‌ करने के बाद भी, उसने मसाले के साथ दो आम के अचार की‌ फांक मेरे टिफिन में डाल दी, अब खेल से मना करके मैं चुपचाप खाना खा रही थी, सब कुछ शून्य सा प्रतीत हो रहा था, मन में  बस यही ख्याल आ रहा था कि अभी थोड़ी देर पहले मैंने इसे कापी देने से मना किया और वह सब कुछ भुलाकर, मेरी मदद कर रही है, एक विशेष गुण दिखने लगा मुझे,  शायद इस मदद के गुण में मैं खुद को उससे छोटा महसूस कर रही थी, सच कितनी अच्छी है यह। फिर उस दिन से उसके प्रति मेरे अंदर पहले का जो व्यवहार था, पूरा‌ बदल गया‌ था। अब रोज सुबह स्कूल जाते वक्त उसे साथ ले जाती, छूटने पर भी‌ साथ ही आते और आगे रहकर मैंने उसे कह भी दिया था कि तुम्हें कभी भी किसी चीज की जरूरत हो तो मुझसे कह सकती हो।😊

०६/०५/२०२१