Sunday, 2 December 2018

फलक

"फलक से,
चाँद सितारे तोड़ने के लिये,
हाथ हमने भी बढ़ाये थे
            पर
एक पल के लिये,
ठिठककर रह गये हम,
"ये" तो वही अपने है
              जो
जहां से चले गये,
हमें रोशनी देने के लिये...."

रंग दुनिया का

"सबको
समझाते समझाते,
अब हमें भी
रूठना आ गया....
सच की गुहार
लगाते लगाते,
मीठा झूठ
बोलना आ गया....
ईमानदारी की हार में भी,
तसल्ली थी जहाँ,
आज
चालबाजी के हुनर से,
जग को
जीतना आ गया....
कभी थे मरहम
सबके लिये हम,
मेहरबानी रही
जालिम जमाने की,
हमें भी घावों को
कुरेदना आ गया...."