कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
जिंदगी के एक मोड़ पर,
ज़िंदगी से ही आशाएं
छोड़ दी थी हमने...
पर अचानक आकर
फिर जिंदगी से दिल्लगी
करवा गया वो...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
रिश्तो की चादर ओढ़कर
दुनिया ने कमी ना छोड़ी
धोखा देने मे...
पर मेरे लिये काल्पनिक शब्द
"सच्चे रिश्ते" की सोच को
हकीकत मे
बदल गया वो ...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में,बदल गया वो....
गमगीनियो, हैरानियों की
उधेड़बुन मे
अंधेरे मे बैठे थे हम
पर..अचानक
खुशियो के दीप जलाकर...
ढेर सारी सौगाते
दे गया
वो...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में,बदल गया वो....
ईश्वर की रहमते. देखी है
बहुत मैने...
पर यकीन नही आता
अचानक खुशियो की बारिश
कैसे कर गया
वो...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
जिंदगी के इस संगीत मे,
सुरो के कई ताने बाने
बुने हमने, पर आज तो
सच मे एक नई तान
छेड़ गया
वो...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
नाराज था बहुत दिनो से
मेरा भगवान मुझसे...
ख्याल उसे मेरा जरूर
आया होगा, तभी इतनी
मेहरबानी
मुझ पर कर गया वो ...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
जीवन की माला से...
प्यार, भरोसा, विश्वास के मोती
कभी के टूट चुके थे...
लंबे अंतराल के
बाद ही सही...
टूटी माला के सभी मोती
पिरो गया वो
...
कब आया और कब चला गया वो ....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
उसके बगैर बेमानी सी
हो गई थी जिंदगी...
पर
प्यार का आलिंगन कर...
इस बेजान में
जान डाल गया वो...
कब आया और कब चला गया वो....
निराशा को आशा में, बदल गया वो....
Bahut Sunder Abhivyakti hai aapki Indu ji.
ReplyDeleteजी,धन्यवाद।
DeleteVery nice
ReplyDeleteVery nice and touching poetry Indus ji. God bless you.
ReplyDeleteThanks for your good wishes uma ji😊
Deleteबहुत ही बेहतरीन सकारात्मक रचना !
ReplyDeleteबहुतही सुंदर और positive विचार !!
ReplyDeleteशब्दों में तारीफ नहीं की जा सकती
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