Tuesday, 10 July 2018

लफ्जों मे उसके, बस सादगी ही नजर आई


लफ्जों मे उसके, बस सादगी ही नजर आई...
उसने हमारी बेपरवाही को
"परवाह" का चोला पहना दिया...

उसका बड़प्पन कहूं या अपनापन
वादा है विश्वास पर उसके खरे उतरेंगे हम...

हाथ अगर थाम लिया, 
तो जिंदगी भर साथ निभायेंगे हम...
क्योंकि अपनेपन की खुश्बु भी
कही से तो आई...
लफ्जो मे उसके सादगी सी नजर आई...

कैसे कह दिया तुमने ?
गुजर जाता है पल मिनटो मे 
पता है ना कितने सेकंड होते हैं
इन मिनटो मे ?

कितने पल मीठी यादे संजोते है हम...
पर सच कहते हो तुम,
इतने साल भी तो 
पंख लगाकर मिनटो मे ही गुजर गये...

एक प्यार भरी धुन कही तो गुनगुनाई
लफ्जो मे उसके बस सादगी ही नजर आई...

खुशनसीब है वो लोग
जिनके घाव पर मरहम लगाने वाले होते हैं...

बहुत गर्व महसूस करते हैं वो लोग,
जिनके पास दोस्ती की दौलत होती हैं...

बहुत खुशनसीब है वो लोग 
जिनकी फिकर करने वाले होते है...

सच पूछो तो कलकल करती
प्यार भरी लहर अभी कही से तो आई

लफ्जो मे उसके बस सादगी ही नजर आई...

10 comments:

  1. वाह इंदु जी आप पर तो मां सरस्वती की कृपा बरसती है कितना सुंदर लिखती हैं आप

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  2. वाह इंदु जी आप बहुत अच्छा लिखती हैं मां सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे

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    1. आपका स्नेह मिलता रहे।

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