अपना कोई तुम्हें, अपना ना कहे,
तो रूठ मत जाना,
इस व्यस्त जिंदगी में,
अपनो का प्यार ना मिले,
तो टूट मत जाना,
गुजारिश है मेरी,
बहतीं नदियाँ बने रहना,
गम के सागर में, डूब मत जाना,
हौंसला रखो, मंजिल पाने का,
गर ना मिले तो,
उस राह से छूट मत जाना ।
इस 'खुबसूरत सृष्टि' की एक रचना हूँ मैं | मेरा नाम इंदु आचार्य है और अदना सा शौक है अपने विचारों को कागज़ पर उतरने का | मैंने अपने लेखन में प्रकृति, जीवन के रूपों, भावनाओं को समेटने की कोशिश की है | आपको कहीं प्यारभरी सौगातें देखने को मिलेंगी तो कहीं दर्दभरी दास्ताँ | मैं अपने विचार, अपनी सोच, अपने तरीके से आपके समक्ष रख रहीं हूँ | आशा है, आपको मेरी लेखनी पसंद आयेगी |
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भावनाओं का सजीव चित्रण
ReplyDeleteआभार सहित धन्यवाद सुनील जी
Deleteजलज़ला सा है दिल की गलियो में,
ReplyDeleteशायद तेरे एहसास गुज़रे है इधर से
धन्यवाद, बहुत खूब ।
DeleteKavita ke jarie sahi margdarshan de rahe ho
ReplyDeleteAti sunder
धन्यवाद जी,
DeleteVery nice
ReplyDeleteThanks🌺
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