Thursday, 8 April 2021

"नवीनता में निरन्तरता"

"नवीनता में निरन्तरता"

नवीन सुप्रभात हो आई है
वो भरमार नवीनता लाई है,
 नवीन लालिमा, नवीन किरण
 वो नवीन रोशनी धरती तक,
नवीन उमंग, नवीन तरंग
वो मृदंग बाजे दूर तलक,
नवीन साधना, नवीन भावना
वो सुंदर अभिव्यक्ति गहरे तक
नवीन कागज, नवीन कलम
वो प्रेमन रचना छूती मन,
नवीन पात और नवीन कोंपले
देखो, पवन चलीं हौले हौले,
नवीन गद्य वो नवीन पद्य
वो नया नया सा हर एक छन्द,
नवीन भजन और प्रभु स्मरण
वो सच्ची प्रार्थना ईश्वर तक,
कहे रत्नाकर 'ओ' नवीन लहर
आहिस्ता उठो ये है नवीन डगर,
नवीन चेतना, खुशी, मौन संग
आनंद समाया अन्तर्मन तक,
उतरे आचरण में नवीन विचार
तत्पर है करने परोपकार
मेरा 'मै' भी नूतन होकर
मुक्त हुआ है, परमसत्य में।
हुआ नवीन सृजन, नये उद्गार
वो नया उत्साह अम्बर तक।
--- इंदु आचार्य ✍️
---०९/०४/२०२१

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